प्रेम अपने सिवाय कुछ नही देता और अपने सिवाय दूसरे किसी से कुछ नही लेता,प्रेम किसी पर अधिकार नही करता,न अपने ऊपर किसी का अधिकार स्वीकार करता है,क्यूंकि प्रेम अपने लिए अपने आप में ही पर्याप्त है ।
Something beautiful I came across
Monday, January 14, 2008
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